ग्रेच्युटी कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- आखिरी महीने की बेसिक पे और DA डालें।
- नौकरी के साल और महीने डालें।
- चुनें कि आपकी कंपनी ग्रेच्युटी एक्ट के दायरे में है या नहीं।
इस टूल के बारे में
Payment of Gratuity Act, 1972 के तहत ग्रेच्युटी = 15 × आखिरी सैलरी × नौकरी के साल ÷ 26, जहाँ सैलरी आखिरी महीने की बेसिक पे और महंगाई भत्ता (DA) है, 15 का मतलब हर साल के 15 दिन की मज़दूरी और 26 महीने के कामकाजी दिन हैं। आखिरी अधूरे साल में 6 महीने से ज़्यादा हों तो उसे पूरा साल माना जाता है; 6 महीने या कम हों तो छोड़ दिया जाता है। जो कंपनियां Act के दायरे में नहीं आतीं, उनके लिए आमतौर पर 15 ÷ 30 × सैलरी × पूरे किए गए साल लगाया जाता है।
उदाहरण: ₹50,000 बेसिक + DA और 10 साल 7 महीने की नौकरी → 11 साल → 50,000 × 15 × 11 ÷ 26 = ₹3,17,308। ग्रेच्युटी के लिए आमतौर पर कम से कम 5 साल की लगातार नौकरी ज़रूरी है (मृत्यु या विकलांगता में यह शर्त नहीं)। प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पूरे करियर में ₹20 लाख तक की ग्रेच्युटी टैक्स-फ्री है; सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ्री है। नए लेबर कोड में fixed-term कर्मचारियों के नियम अलग हो सकते हैं — अपनी कंपनी से पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
10 साल 7 महीने की नौकरी पर ग्रेच्युटी कैसे निकलेगी?
7 महीने 6 से ज़्यादा हैं, इसलिए 11 साल गिने जाएंगे। ₹50,000 बेसिक + DA पर ग्रेच्युटी = 50,000 × 15 × 11 ÷ 26 = ₹3,17,308।
क्या 5 साल से पहले ग्रेच्युटी मिलती है?
आमतौर पर नहीं — 5 साल की लगातार नौकरी ज़रूरी है, सिवाय मृत्यु या विकलांगता के। कुछ मामलों में अदालतों ने 4 साल 240 दिन को 5 साल माना है।
कितनी ग्रेच्युटी टैक्स-फ्री है?
गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए पूरे करियर में ₹20 लाख तक। इससे ऊपर की रकम पर सैलरी की तरह टैक्स लगता है।
30 की जगह 26 से भाग क्यों देते हैं?
Act में महीने को 26 कामकाजी दिन माना गया है (4 साप्ताहिक छुट्टियां छोड़कर), इसलिए 15 दिन की मज़दूरी = महीने की सैलरी × 15 ÷ 26।