होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- अपनी नेट मासिक आय और जो EMI पहले से भर रहे हैं, वह डालें।
- FOIR 50% रहने दें या अपने बैंक का आंकड़ा डालें।
- ब्याज दर और अवधि डालकर अधिकतम लोन देखें।
इस टूल के बारे में
बैंक आमतौर पर आपकी सभी EMI को मिलाकर नेट मासिक आय के एक तय हिस्से तक ही रखने देते हैं — इसे FOIR (fixed obligations to income ratio) कहते हैं, जो आय के हिसाब से अक्सर 40–60% होता है। इसलिए नई EMI की गुंजाइश = आय × FOIR − मौजूदा EMI, और अधिकतम लोन वह रकम है जिसे यह EMI चुका सके: लोन = EMI × ((1 + r)n − 1) ÷ (r × (1 + r)n), जहाँ r महीने की दर और n महीने हैं।
उदाहरण: ₹1,00,000 आय, ₹10,000 मौजूदा EMI और 50% FOIR पर नई EMI के लिए ₹40,000 बचते हैं — 8.5% पर 20 साल के लिए लगभग ₹46 लाख का लोन। RBI लोन-टू-वैल्यू अनुपात भी तय करता है (₹30 लाख तक के लोन पर 90% तक, ₹75 लाख तक 80%, उससे ऊपर 75%), इसलिए बाकी रकम डाउन पेमेंट के रूप में देनी होती है, साथ में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन भी। लंबी अवधि और को-एप्लिकेंट की आय से एलिजिबिलिटी बढ़ती है; अच्छे क्रेडिट स्कोर से कम दर मिलने में मदद मिलती है। असली रकम बैंक की पॉलिसी पर निर्भर करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
₹1 लाख सैलरी पर कितना होम लोन मिल सकता है?
बिना दूसरी EMI के, 50% FOIR, 8.5% और 20 साल पर लगभग ₹57.6 लाख। ₹10,000 की मौजूदा EMI होने पर यह करीब ₹46 लाख रह जाता है।
FOIR क्या है?
Fixed obligations to income ratio: मासिक आय का वह हिस्सा जो सभी EMI में जा सकता है। बैंक आमतौर पर 40–60% मानते हैं।
होम लोन एलिजिबिलिटी कैसे बढ़ाएं?
को-एप्लिकेंट जोड़ें, लंबी अवधि चुनें, छोटे लोन और क्रेडिट कार्ड का बकाया चुका दें, और क्रेडिट स्कोर अच्छा रखें।